भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम का दावा करता हुआ एक लेटर वायरल हुआ है। इस तथाकथित पत्र में दावा किया जा रहा है कि ज्ञानेश कुमार ने मुख्य आयुक्त पद से इस्तीफा दे दिया है। अब ECI ने सच बताया है।

वायरल लेटर के अनुसार, 'आत्मचिंतन और विचार के बाद यह फैसला लिया गया है। मैं भारत सरकार और इस महान देश के नागरिकों का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझपर भरोसा किया। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सेवा करने और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता निष्पक्षता को ऊंचा बनाए रखने का मौका मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है।'
चुनाव आयोग ने बताया सच
अब चुनाव आयोग ने इस पत्र को फर्जी करार दिया है। पीटीआई के मुताबिक, आयोग के प्रवक्ता ने तथाकथित त्यागपत्र को फर्जी बताया है। खास बात है कि इस फर्जी वायरल लेटर में मुख्य चुनाव आयुक्त के हस्ताक्षर किए गए थे और राष्ट्रपति मुर्मू के नाम भेजा गया था। प्रवक्ता ने कहा कि यह पत्र एआई जनरेटेड है और मनगढ़ंत है। लोगों से अपील की कि इस तरह के फर्जी लेटर पर विश्वास न करें।
मीडिया रिपोर्ट के बाद चर्चा में ज्ञानेश कुमार:
हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों और मुख्य आयुक्त के बीच SIR को लेकर मतभेद थे। साथ ही कहा गया था कि कई मौकों पर CEC के सामने आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन इन्हें माना नहीं गया। इसके अलावा भी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
अखबार की खबर में दावा किया गया था कि संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। इन आपत्तियों में वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
इसके जवाब में चुनाव आयोग आपसी मतभेदों से साफ इनकार किया था। साथ ही कहा था कि मतदाता सूची की जांच के फैसले सभी की सहमति के बाद ही लिए गए थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि वैचारिक मतभेदों को टकराव नहीं माना जाना चाहिए। आयोग ने यह भी बताया कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है।
आयोग ने कहा कि हाल के महीनों में उसने देशभर में एसआईआर समेत कई फैसले लिए हैं। आयोग ने 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर कराने का आदेश जारी किया था, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई और इसके बाद पश्चिम बंगाल तथा 30 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू किया गया। आयोग ने कहा कि यह आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किया गया था।
विपक्ष हुआ एकजुट
मीडिया रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दलों ने आयोग के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट तक भी मामला ले जाने की बात कही थी। इसके अलावा एसआईआर को रोकने और पुराने चुनावों को दोबारा कराए जाने तक की मांग उठाई गई थी।
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